
मेरे पति के अनुपस्थिति में मैं अपने ससुरजी से खूब मजे किये है। वैसे वह है तो 50 के लगभग लेकिन चुदाई करने मे माहिर है। उनसे करवाने में मुझे बहुत आनंद आता है। वह कभी कभी दोपहर की हमारे यहाँ आते है और शाम तक यहाँ रुक कर जाते है। वैसे ही उस दिन भी कोई एक बजे के समय आये हैं। उन्हें खाना परोसते मैंने मेरे पति को फ़ोन किया और ससुरजी के आनेकी बात कही। वह शाम सात बजे तक आने को कह बाबूजी यानि के मेरे ससूरजजी को रुकने को बोले। इस से मुझे पक्का हो गाया है कि वह शाम से पहले नहीं आने वाले है। उसके बाद ससुरजी ने मेरे बेडरूम में मेरे रिसते बुर में अपना मुस्टंड पेलकर मुझे लेते हुए संगीता से उनकी चुदाई के बारेमें बताये। संगीता मेरी ननद है और ससुरजी की पहली पत्नी से जन्मी बेटी है। (ससुरजी से मेरे रंगरेलियां 3) में पढ़िए।
इसके दुसरे दिन में सुबह गयारह बजे संगीता के घर पहुंची। "ओह हेमा आवो" कहकर उसने मुझे अंदर बुलाई और हम दोनों उसके बैडरूम में बैठे हे।






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