
स्नेहा दीदी बिस्तर पर पूरी तरह से नंगी होकर लेटी थी। मैं बार-बार उस किताब में देख कर समझने की कोशिश कर रहा था कि उनके नाज़ुक हिस्सों को कैसे सहलाना है, कहाँ छूने पर उन्हें अच्छा लगेगा और मैं कैसे धीरे-धीरे अपना लंड अंदर डालूँ, ताकि दीदी को दर्द ना हो, बल्कि उन्हें मज़ा आए।
मैं थोड़ा हिचकिचाया, दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था और हाथ काँप रहे थे। तभी दीदी ने मेरी तरफ देखा। उनकी आँखों में शरारत भी थी और भरोसा भी।






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