
स्नेहा दीदी काम के लिए बैंगलोर चली गई और अचानक सब कुछ बदल गया। जब आपकी बड़ी बहन जिसके बदन से आप किसी भी वक्त खेल सकते हैं, वह आपसे दूर चली जाती है तो सब उदास लगने लगता है।
मैं अकसर उन पलों को याद करता रहता था, जब घर में कोई नहीं होता था। मैं चुपके से दीदी के पास जाकर कुछ सेकेंड के लिए उनके उभरे हुए सीने को दबा लेता था। उनके होंठों पर हल्की-सी चोरी से चुम्मी ले लेता था। कभी-कभी उनकी ब्रा और पैंटी को हाथ में लेकर अपने अंदर की भूख निकाल देता था। उनकी ड्रेस के नीचे से झलकती गहरी क्लीवेज मुझे पागल कर देती थी, और मैं घंटों उन्हीं ख्यालों में खोया रहता था।






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